Lahar

मै और मेरी तन्हाई .....

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तुम गये, सब छोड़ गये...

Posted On: 27 Sep, 2013 Others,कविता,Hindi Sahitya में

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तुम गये, सब छोड़ गये।

गैरों की इस दुनिया में,

हम अकेले हो गये।

तुम गये, सब छोड़ गये।

तेरे जाने का हिसाब,

ना जाने किस किस

से मैंने लिया,

छोड़ के तु गई,

हिसाब औरों ने दिया,


तनहा भरी इस भीड़ में,

लहर फिर अकेला हो गया।



तुम गये, सब छोड़ गये।

ये सितारों कि दुनिया,

किसे चाहिये थी।

तुम बिन ये नामुराद,

जिंदगी किसे चाहिये थी।


तेरी भावनाओं का स्पर्श,

किसी जन्नत से कम तो नहीं था।

तुम गये, सब छोड़ गये।

तनहा भरी इस भीड़ में,

लहर फिर अकेला हो गया।

अब ना यकीन तुझ पर,

ना अब यकीन मुहब्बत पर है।


जालिम है दुनिया,

धोखे बड़े देती है,

वादा कर उम्र भर साथ का,

बीच राह में छोड़ देती है।

तुम गये, सब छोड़ गये।

तनहा भरी इस भीड़ में,

लहर फिर अकेला हो गया।

.……….by Lahar

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9 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
October 23, 2013

भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति|….

nishamittal के द्वारा
October 8, 2013

सुन्दर प्रस्तुति

    Pankaj Kumar के द्वारा
    October 10, 2013

    धन्यवाद जी..

prerana के द्वारा
October 1, 2013

बहुत सुन्दर !

    Pankaj Kumar के द्वारा
    October 1, 2013

    शुक्रिया जी। 

yatindranathchaturvedi के द्वारा
September 30, 2013

बेहतरीन, बधाई, सादर

    Pankaj Kumar के द्वारा
    September 30, 2013

    शक्रिया।

September 28, 2013

bhavnatmak abhivyakti

    Pankaj के द्वारा
    September 29, 2013

    बहुत - बहुत धन्यवाद..


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