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मै और मेरी तन्हाई .....

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निराशा के सिवा और कुछ नही !

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साल भर पहले जब एक युवा मुख्यमंत्री ने देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की कमान संभाली तो जनता में यह विश्वास जगा की यह युवा मुख्यमंत्री राज्य में युवाओं के लिए बेहतर शिक्षा , रोजगार लायेंगे । इसकी सोच अन्य नेताओ से अलग होगी । राज्य के विकास के लिए उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा । मुख्यमंत्री अपने सभी चुनावी वादे पुरे करेंगे और अपनी पार्टी की गुंडा छवि को सुधारने की कोशिश करेंगे । अखिलेश सिंह यादव के मुख्यमंत्री बनने के एक वर्ष बाद भी आज यदि उनके कार्यकाल का निरीक्षण करे तो सिर्फ निराशा और कमजोर नेतृत्व के सिवा हमे कुछ नही दिखाई देता है  ।


पूर्ण बहुमत का जादुई आकड़ा प्राप्त कर प्रदेश में युवाओ के रोल मॉडल बने अखिलेश सिंह यादव की छवि आज एक कमजोर नेता के रूप में बन गयी है । जिसका खुद की सरकार पर  पूर्ण नियंत्रण नही है । सरकार में शक्ति के कई केंद्र (मुलायम सिंह , शिवपाल , आजम खान ) हो गये है । मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव का फैसला उनका खुद का फैसला नही होता है । सरकार और पार्टी में शक्ति के कई केंद्र होने की वजह से विचारो और फैसलों में टकराव होना लाजमी है । यही कारण  है कि सरकार को पिछले एक साल में अपने कई फैसलों को 24 घंटे के अन्दर वापस लेने पड़ गये । जिससे ना केवल मुख्यमंत्री की छवि पर धक्का लगा साथ ही सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवालिया निशान खड़े हो गये ।


उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी पर पहले से ही गुंडों की पार्टी जैसे आरोप लगते रहे है अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल में अपराधिक छवि के लोगो को भरपूर स्थान देकर अपनी पार्टी पर लगने वाले आरोपो को सही साबित करने का मौका दे दिया । उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार में 11 हिस्ट्रीशीटर कैबिनेट मंत्री बने हुए है । मंत्री दुर्गा यादव  पर 14 अपराधिक मामले चल रहे है । मंत्री राजाराम पाण्डेय पर हत्या समेत 12 मामले चल रहे है डी एस पी जिया उल हक की हत्या के मामले से एक बार फिर चर्चा में आये रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा  भैया  पर इलहाबाद , प्रतापगढ़ , कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न थानों में कुल 36 अपराधिक मामले चल रहे है ।


मायावती के बारे में उत्तर प्रदेश में एक बात मशहूर है की वो अधिकारियो का तबादला बहुत करती है । जिसकी समाजवादी पार्टी खुली आलोचक रही है लेकिन 26  फ़रवरी 2013 को मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव ने 24 घंटे के अन्दर  51 IAS , 48 PCS , 88 IPS और 92 PPS का तबादला कर दिया ।आप बताइए कि मायावती और अखिलेश में क्या अंतर है ? एक दिलचस्प बात और लखनऊ के कुल 40 पुलिस थानों में 27 जगह ” यादव ” दरोगा है । प्रदेश सरकार से लोगो की उम्मीदे दिन प्रति दिन धराशाही होती जा रही है ।


पंकज कुमार
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
March 14, 2013

उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी पर पहले से ही गुंडों की पार्टी जैसे आरोप लगते रहे है अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल में अपराधिक छवि के लोगो को भरपूर स्थान देकर अपनी पार्टी पर लगने वाले आरोपो को सही साबित करने का मौका दे दिया । उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार में 11 हिस्ट्रीशीटर कैबिनेट मंत्री बने हुए है । मंत्री दुर्गा यादव पर 14 अपराधिक मामले चल रहे है । मंत्री राजाराम पाण्डेय पर हत्या समेत 12 मामले चल रहे है डी एस पी जिया उल हक की हत्या के मामले से एक बार फिर चर्चा में आये रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया पर इलहाबाद , प्रतापगढ़ , कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न थानों में कुल 36 अपराधिक मामले चल रहे है ।सुन्दर आलेख

    Lahar के द्वारा
    March 16, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद |

Manisha Singh Raghav के द्वारा
March 14, 2013

प्रिय लहार जी , आप जैसे नये लेखकों को आगे बढ़ते देखना बहुत अच्छा लगता है । बहुत अच्छा प्रयास बस क्या कहूँ लेखन विधा के क्षेत्र में खूब तरक्की करते रहो ।

    Lahar के द्वारा
    March 16, 2013

    प्रिय मनीषा जी सप्रेम नमस्कार उत्साहवर्धन के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |


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