Lahar

मै और मेरी तन्हाई .....

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आ रहा बसंत है ...

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आ रहा बसंत है ,
बढ़ रहा उमंग है ।


पुरानी पत्तियाँ है जा रही ,
नयी पत्तियाँ  है आ रही ।


टूट चुकी है टहनियाँ ,
लगती है मानो दादी
की पुरानी  कहानियाँ  ।


आ रहा बसंत है ,
बढ़ रहा उमंग है ।


तड़पा रही दिन में ,
सूर्य की कशिश है |
कर रही आलिंगन  ,
रात में चाँद की कशिश है  |


अब तो हर तरफ ,
मौसम सुहाना है |
लगता है हमे भी ,
अपना दुःख भुलाना है |


आ रहा बसंत है ,
बढ़ रहा उमंग है ।


इस बसंत में कर रहा प्रण मै  भी हूँ !
भारत को क्षितिज पर ले जाना है
क्योकि भारतीय मै  भी हूँ  ।।


आ रहा बसंत है ,
बढ़ रहा उमंग है ।

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
February 25, 2013

टूट चुकी है टहनियाँ , लगती है मानो दादी की पुरानी कहानियाँ । आ रहा बसंत है , बढ़ रहा उमंग है । सुन्दर भाव लहर जी !

    Lahar के द्वारा
    March 2, 2013

    धन्यवाद जी

Madan Mohan saxena के द्वारा
February 25, 2013

बहुत सुंदर भावनायें और शब्द भी …बेह्तरीन अभिव्यक्ति …!!शुभकामनायें प्यार से अपना जीवन सभारों जरा ,प्यार से रहकर हर पल गुजारो जरा प्यार से मंजिल पाना है मुश्किल नहीं , इन बातों से बिलकुल न इंकार है

    Lahar के द्वारा
    March 2, 2013

    बहुत खूब ! शुक्रिया

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
February 24, 2013

क्यों की भारतीय में भी हूँ. बहुत खूब सुन्दर भाव सुन्दर वसंत बधाई

    Lahar के द्वारा
    March 2, 2013

    शुक्रिया |

alkargupta1 के द्वारा
February 23, 2013

“टूट चुकी हैं टहनियां लगतीं हैं मानो दादी की पुरानी कहानियां |”… “भारत को क्षितिज पार ले जाना है क्योंकि भारतीय मैं भी हूँ |” अति सुन्दर भाव

    Lahar के द्वारा
    March 2, 2013

    बहुत बहुत धन्यवाद |

shashi bhushan के द्वारा
February 23, 2013

आदरणीय लहर जी, सादर ! “आ रहा बसंत है , बढ़ “रही” उमंग है । “इस बसंत में कर रहा प्रण मै भी हूँ ! भारत को क्षितिज पर ले जाना है क्योकि भारतीय मै भी हूँ ।।” बहुत सुन्दर भाव !

    Lahar के द्वारा
    March 2, 2013

    धन्यवाद


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