Lahar

मै और मेरी तन्हाई .....

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आ रहा बसंत है

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आ रहा  बसंत है , बढ़ रहा उमंग है !

पुरानी पत्तियाँ है जा रही ,

नयी पत्तियाँ है आ रही |


टूट चुकी है टहनियाँ,

लगती है मानों ,

दादी की पुरानी कहानियां |



आ रहा  बसंत है , बढ़ रहा उमंग है !

पुरानी पत्तियाँ है जा रही ,

नयी पत्तियाँ है आ रही |


तड़पा रही दिन में ,

सूर्य की तपिश है |

कर रही आलिंग्न रात में ,

चाँद की कशिश है |


आ रहा बसंत है , बढ़ रहा उमंग है |


अब तो हर तरफ मौसम सुहाना है |

लगता है हमे भी अपना दुःख भुलाना है |


आ रहा बसंत है , बढ़ रहा उमंग है |


इस बसंत में कर रहा प्रण मै भी हूँ ,

भारत को क्षितिज़ पर ले जाना है !

क्यों की भारतीय मै भी हूँ |


आ रहा  बसंत है , बढ़ रहा उमंग है !

पुरानी पत्तियाँ है जा रही ,

नयी पत्तियाँ है आ रही |

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26 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

अलीन के द्वारा
February 5, 2012

लहर जी, नमस्कार! बसंत के आगमन की सन्देश पहुचने की सफल कोशिश…परन्तु शब्दों के चयन में कही कुछ कमी सी रह गयी है…इससे बेहतर लिख सकते थे आप.

    Lahar के द्वारा
    December 8, 2012

    धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
February 5, 2012

खूबसूरत कविता, कृपया इसे भी पढ़े- नेता कुत्ता और वेश्या

    Lahar के द्वारा
    February 10, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद दिनेश जी

Sumit के द्वारा
February 1, 2012

बसंत पंचमी की सुभ कामनाएं …बहुत सुंदर और अच्छी कविता http://sumitnaithani23.jagranjunction.com/2012/01/31/आम-आदमी-और-भिखारी/

    Lahar के द्वारा
    February 10, 2012

    सुमित जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

newrajkamal के द्वारा
January 31, 2012

आ रहा बसंत है , बढ़ “रही” उमंग है ! सच में ही खुशी बढाने वाली कविता पर मुबारकबाद http://rajkamal.jagranjunction.com/2012/01/24/पराये-मुंह-मियाँ-मिटठू-बध/ :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

    Lahar के द्वारा
    February 10, 2012

    प्रिय राजकमल जी सप्रेम नमस्कार आपको एक बार फिर आपको अपने मंच पर पाकर अत्यंत ख़ुशी हुई | प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

munish के द्वारा
January 30, 2012

लहरजी आपकी कविता में कुछ पंक्तियाँ वाकई अच्छी हैं…… ! लेकिन पता नहीं क्यों मुझे लगता है की ये अधूरी है ……. आप बहुत कुछ लिखना चाहते थे और शायद कुछ सोचकर या समय के अभाव के कारण जल्दी समाप्त कर दी ……. खैर ये एक अच्छा प्रयास कहा जा सकता है :)

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय मुनीश जी सप्रेम नमस्कार ये कविता मैंने क्लास 11 में लिखा था | उस उम्र में मेरी समझ काफी कम थी शायद इसीलिए कविता पूरी नहीं हो पायी | बहुत दिनों से सोच रहा था की इसे जागरण पर पोस्ट कर दूँ ! इस बार मौका मिला तो पोस्ट कर दी | आपको मेरा ये प्रयास अच्छा लगा इसके लिए धन्यवाद |

akraktale के द्वारा
January 30, 2012

लहर जी नमस्कार, पुरानी पत्तियाँ है जा रही , नयी पत्तियाँ है आ रही | अवश्य ही आशावादी सन्देश देती ये पंक्तिया. बसंत को और भी खुशनुमा बनाती हैं. बधाई.

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय अक्रक्ताले जी नमस्कार आपको बंसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएं | ये बंसंत आपके जीवन में खुशियाँ लाये | प्रतिक्रिया के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद

sadhana thakur के द्वारा
January 29, 2012

अच्छे भाव ….बसंत का बहार सब पर छाया रहे ……..लहर जी ,नमस्कार ……

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय साधना जी नमस्कार आपको बंसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएं | ये बंसंत आपके जीवन में खुशियाँ लाये | धन्यवाद

sinsera के द्वारा
January 29, 2012

बहुत ही सुन्दर वासंती लहर, छोटी सी उम्र में भारत को क्षितिज पर ले जाने का अरमान बहुत अच्छा लगा.बधाई..

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

mparveen के द्वारा
January 28, 2012

लहर जी सुंदर रचना के लिए आपको बधाई …. बसंत पंचमी की भी हार्दिक बधाई ….

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय परवीन जी नमस्कार आपको भी बंसंत पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएं | ये बंसंत आपके जीवन में खुशियाँ लाये | धन्यवाद

anandpravin के द्वारा
January 28, 2012

लगता है इस बार बसंत का झोंका काफी “लहर” के साथ आ रहा है सुन्दर रचना

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय आनंद जी नमस्कार बसंत तो हमेशा लहर के साथ ही आती है | प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद |

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
January 28, 2012

इस बसंत में कर रहा प्रण मै भी हूँ , भारत को क्षितिज़ पर ले जाना है ! क्यों की भारतीय मै भी हूँ | बधाई, प्राण जाए पर वचन न जाए . सुंदर.

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय प्रदीप जी नमस्कार इस बसंत पर हम सभी को यही प्रण करना चाहिए की भारत को हमे आगे ले जाना है | धन्यवाद

sumandubey के द्वारा
January 28, 2012

बहुत सुन्दर रचना लहर जी

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    सुमन जी धन्यवाद

abodhbaalak के द्वारा
January 28, 2012

लहर जी आपने तो मन में बसंत की उमंग यूँ जगा दी की ………. बहुत खूबसूरत सामान बंधा है अपने basnt का ऐसे ही लिखते रहें http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    Lahar के द्वारा
    January 30, 2012

    प्रिय अबोध जी नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद


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