Lahar

मै और मेरी तन्हाई .....

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मेरी अर्थी - मेरी चाहत

Posted On: 11 Sep, 2011 Others में

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सजाओ महफ़िल दुनिया वालो ,

अर्थी मेरी आज उठने वाली है |


इस राह पें न बरसाओ पानी यें बादल

मेरी अर्थी इसी राह से जाने वाली है |


सजाओ महफ़िल दुनिया वालो ,

अर्थी मेरी आज उठने वाली है |


मत रो ए  साकी  ,

वरना डूब जायेगा यें मैखाना |


सुखा दिए है मैंने अपनी आँखों के आंसू ,

साकी तू इन्हें फिर से ना भिगोना |


ना चमका तु बिजलियाँ  यें बादल ,

सुना है गैरों से  !

मेरी अर्थी पर फूल वो भी चढाने वाली है |


सजाओ महफ़िल दुनिया वालो ,

अर्थी मेरी आज उठने वाली है |


ना खेल हवाओं से ए बादल ,

वो तेरे शोर से डरने वाली है |


ठहर भी जा अब ए बादल ,

मेरी अर्थी को देखने वो भी आने वाली है |


सजाओ महफ़िल दुनिया वालो ,

अर्थी मेरी आज उठने वाली है |



तु क्यों रोती है साकी ,

दुनिया तो एक मैखाना है |


जहाँ हर कोई बस एक दीवाना है ,

ना कर प्यार तु कभी !

प्यार तो बस एक अफसाना है |


सजाओ महफ़िल दुनिया वालो ,

अर्थी मेरी आज उठने वाली है |


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33 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

syeds के द्वारा
September 28, 2011

लहर जी, सुन्दर रचना के लिए बधायी.. http://syeds.jagranjunction.com

    Lahar के द्वारा
    September 29, 2011

    प्रतिक्रिया के लिए कोटिशः धन्यवाद |

chaatak के द्वारा
September 26, 2011

स्नेही लहर जी, आपकी इस रचना को पढ़कर मुझे अपने पसंदीदा गजल गायक अताउल्ला खान साहब की गाई गजलें स्मरण हो आईं| अति व्यस्तता के कारण आजकल उन ग़ज़लों को सुन नहीं पा रहा था लेकिन आपने उन्हें फिर से सुनने की प्यास जगा दी| अच्छी रचना पर हार्दिक बधाई!

    Lahar के द्वारा
    September 28, 2011

    बहुत बहुत धन्यवाद भाई – जान |

naturecure के द्वारा
September 14, 2011

श्री लहर जी, सप्रेम नमस्कार ! सुन्दर रचना के लिए बधाई ……………………………..| naturecure पर प्रथम प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद | वास्तव में यह हमारा दुर्भाग्य है की हम दूध -दही, नींबू पानी की संस्कृति को छोड़ चाय,काफी, कोल्ड ड्रिंक आदि को अपना रहे हैं जो की सर्वथा अस्वास्थ्यकर है |

    Lahar के द्वारा
    December 8, 2012

    धन्यवाद

div81 के द्वारा
September 13, 2011

लहर जी, अच्छा प्रयास, मेरी शुभकामनाये आप के साथ है ऐसे ही लिखते रहिये

    Lahar के द्वारा
    September 13, 2011

    दिव्या जी सप्रेम नमस्कार , प्रतिक्रिया के लिए कोटिशः धन्यवाद , पहली बार आपने प्रतिक्रया दी बहुत ख़ुशी हुई |

Amita Srivastava के द्वारा
September 12, 2011

सुंदर भाव से सजी सुंदर रचना . लहर जी, बधाई .

    Lahar के द्वारा
    September 13, 2011

    अमिता जी सप्रेम नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए बहुत – बहुत धन्यवाद |

Tufail A. Siddequi के द्वारा
September 12, 2011

लहर जी सुन्दर रचना. http://siddequi.jagranjunction.com

    Lahar के द्वारा
    September 12, 2011

    तुफैल जी सप्रेम नमस्कार , प्रतिक्रया के लिए कोटिशः धन्यवाद |

Vinita Shukla के द्वारा
September 11, 2011

अच्छा प्रयास. शुभकामनाएं.

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    विनीता जी सप्रेम नमस्कार , प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

akraktale के द्वारा
September 11, 2011

 लहरजी क्या दिवानों सी बात करते हो सजाओ महफ़िल दुनिया वालो , अर्थी मेरी आज उठने वाली है | अरे फटी पतंग पर सिर्फ लेई की चिपकी लगा दो तो वो भी दो पेंच काटकर आती है,फिर ये तो दिल है.

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    वाह ! भाई क्या बात कही है आपने !!! आपके अनमोल प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद :

rajkamal के द्वारा
September 11, 2011

प्रिय लहर जी ….. बबम बम बम बम लहरी -लहर लहर लहरी लहरी …. आप की यह कविता आपकी सीधी पहुँच (बादलों तक ) को दर्शाती है ….. अब जब पता चल ही गया है तो अगर हमे कोई काम पड़ा तो आपको याद जरूर किया जाएगा ….. कभी मैंने लिखा था :- अभी तुने मेरी दीवानगी देखि कहाँ है अर्थी से भी दौड़े चले आते गर जान जाते की तुने मेरे खुदा ने मुझको बुलाया है ….. भाव कैसे भी हो मुझको पसंद आये एक रचनाकार को इन रंगों को भी बिखेरना चाहिए जोकि उसने देखे न हो – महसूस न किए हो ….. मुबारकबाद :) :( ;) :o 8-) :| :| 8-) :) ;) :( :o

    वाहिद काशीवासी के द्वारा
    September 11, 2011

    अच्छा प्रयास किया है आपने। वैसे राजकमल भाई की अंतिम पंक्तियों पर ध्यान दें ऐसा ही कुछ मेरा भी विचार है। और आपके उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ देता हूँ।

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    प्रिय राजकमल जी सप्रेम नमस्कार , ये गजल तो अनायास ही एक दिन कलम ने लिख दी , मै जब भी कोई कविता या गजल लिखता हूँ तो दिल को बहुत सुकून मिलता है | चाहे वो कविता राष्ट्र पर हो या प्रेम पर , दिल को बहुत ख़ुशी होती है , ये गजल पोस्ट करते वक्त काफी डर लग रहा था | आप लोगो के स्नेह ने बहुत हमे आत्मविश्वास दिया है | उम्मीद है आप इसी तरह मेरा आत्मविश्वास आगे भी बढ़ाते रहेंगे | धन्यवाद :

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    प्रिय वाहिद भाई सप्रेम नमस्कार , पहले तो आपको कोटिशः : धन्यवाद की अपने प्रतिक्रिया दी | आप बहुत अच्छी गजले लिखते है , आपके पास उर्दू के गजब के शब्द है , हमे तो उर्दू आती ही नहीं , आपके ब्लॉग पढ़ – पढ़ कर सीखने की कोशिश करता हूँ | आपने प्रतिक्रिया दी बहुत ख़ुशी हुई | उम्मीद है आप मुझे इसी तरह प्रेरित करते रहेंगे |

sadhana thakur के द्वारा
September 11, 2011

आप तो युवा हैं लहर जी ,,,,,,,,,,,कुछ जोश की बात कीजिये ,इश्क ही करना हैं तो वतन से कीजिये , फ़ना ही होना हैं तो देश के लिए होइए ,,,,

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    साधना जी सप्रेम नमस्कार , भारत देश से तो इश्क बचपन से है | देश से इश्क करना नहीं पड़ता , आपके संस्कार , विचार आपको खुद ही देश की तरफ खीच लाता है | खुदा करे ये जान राष्ट्र की सेवा में निकले | लेकिन वर्तमान भारत के नागरिको के संस्कारो को देख कर दुःख भी होता है | आप मेरी ये कविता जरुर पढिएगा | मै इसका लिंक नीचे दे रहा हूँ , ये कविता भारत के वर्तमान पर आधारित है , जिसे सोच कर दुःख होता है ! http://lahar.jagranjunction.com/2011/04/28/%E0%A4%AE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%9B-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A4%BE/

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद | उम्मीद है आप आगे भी मेरा मार्गदर्शन करती रहेंगी | धन्यवाद |

nishamittal के द्वारा
September 11, 2011

आपकी रचना अच्छे है,शब्द विन्यास भी परन्तु ऐसी निराशाजनक सोच क्यों?शुभ बोले.बिन माँगा सुझाव

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    निशा जी सप्रेम नमस्कार , मेरी सोच तो ऐसी नहीं है लेकिन वक्त एक सा नहीं रहता | जब ये गजल लिखी थी तो उस वक्त मै काफी दुखी था | बस बैठे – बैठे ये कागज के पन्नो पर ये गजल आ गयी | काफी दिनों से सोच रहा था इस गजल को पोस्ट करू लेकिन हिम्मत नहीं हो रही थी | आज फिर वो ख्याल आया तो हमने पोस्ट कर दी | आपकी प्रतिक्रया के लिए आपको कोटिशः: धन्यवाद

alkargupta1 के द्वारा
September 11, 2011

अति उत्तम कृति ! सुन्दर रचना !

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    अलका जी सप्रेम नमस्कार आपको गजल अच्छी लगी सुन कर ख़ुशी हुई | आपकी अनमोल प्रतिक्रिया के लिए आपको कोटिशः धन्यवाद |

vikasmehta के द्वारा
September 11, 2011

बहुत बढ़िया

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    सप्रेम नमस्कार विकाश जी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद |

Santosh Kumar के द्वारा
September 11, 2011

प्रिय श्री लहर जी ,.नमस्कार अच्छी रचना ,…पुराने दिन याद आ गए ,..बहुत आभार

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    आदरणीय संतोष जी सप्रेम नमस्कार आपके स्नेह भरे शब्दों के लिए आपको बहुत – बहुत धन्यवाद |

    Santosh Kumar के द्वारा
    September 11, 2011

    भाई जी ,.कृपा करके मेरे लिए …आदरणीय जैसे शब्द न प्रयोग करें ,… मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता ,…साभार

    Lahar के द्वारा
    September 11, 2011

    प्रिय संन्तोष जी आप इतना अच्छा लिखते है , आपकी चर्चाये पढने में मजा आता है | jagranjunction की इस वेबसाइट ने हमे बहुत ही अच्छे लेखको से मिलवाया है | यहाँ पर सब लोग उच्च कोटि के लेखक मिलते है , जिनसे हमे काफी कुछ सीखने को मिलता है .| यहाँ पर जितने भी लेखक लिखते है सब मेरे लिए आदर्श है | आपके व्यंग तो निराले होते है , इसी लिए आप को आदरणीय कहा , अगर आपको अच्छा नहीं लगा तो क्षमा प्रार्थी हूँ


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