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मै और मेरी तन्हाई .....

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Pankaj Kumar


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एक गुमनाम ख़त

Posted On: 23 Nov, 2013  
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Hindi Sahitya Others कविता मस्ती मालगाड़ी में

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तुम गये, सब छोड़ गये…

Posted On: 27 Sep, 2013  
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Hindi Sahitya Others कविता में

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अयोध्या

Posted On: 24 Aug, 2013  
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Hindi News Others Politics social issues में

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एहसास

Posted On: 20 Mar, 2013  
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Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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आ रहा बसंत है …

Posted On: 23 Feb, 2013  
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Others मस्ती मालगाड़ी मेट्रो लाइफ लोकल टिकेट में

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उत्तर प्रदेश की सत्ताधारी समाजवादी पार्टी पर पहले से ही गुंडों की पार्टी जैसे आरोप लगते रहे है अखिलेश ने अपने मंत्रिमंडल में अपराधिक छवि के लोगो को भरपूर स्थान देकर अपनी पार्टी पर लगने वाले आरोपो को सही साबित करने का मौका दे दिया । उत्तर प्रदेश की मौजूदा सरकार में 11 हिस्ट्रीशीटर कैबिनेट मंत्री बने हुए है । मंत्री दुर्गा यादव पर 14 अपराधिक मामले चल रहे है । मंत्री राजाराम पाण्डेय पर हत्या समेत 12 मामले चल रहे है डी एस पी जिया उल हक की हत्या के मामले से एक बार फिर चर्चा में आये रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया पर इलहाबाद , प्रतापगढ़ , कानपुर समेत प्रदेश के विभिन्न थानों में कुल 36 अपराधिक मामले चल रहे है ।सुन्दर आलेख

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लहर जी, पहले तो आपके साथ पूरी हमदर्दी... क्योंकि पिछले साल ३१ अगस्त (ईद) के दिन मेरे साथ भी इसी तरह की घटना ( पर्स गुम गया या मार लिया गया था.) मेरे भी कुछ नगद, ATM कार्ड और कुछ जरूरी कागजात चले गए. मैंने तो FIR लिखाने की हिम्मत नहीं की क्योंकि मैं थाने वाले को झेल चुका हूँ. रुपये गए सो गए ATM को मैंने ब्लोक करवा दिया पर आज तक उस बैंक का ATM प्राप्त नहीं कर सका! पुलिस वाले ने आपसे रुपये नहीं लिए यह आपके लिए सुखद था पर बहुत सारे कार्ड्स को बनवाने में आपको और भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा. "कारण चाहे जो भी हो , मुझे बहुत अच्छा लगा , एक पल को सोचा की ये आचार सहिंता पुरे ५ साल लगनी चाहिए | कम से कम आम आदमी को सहूलियत तो होगी | काश पुरे भारत में ऐसा हो जाये | जितने आराम से मैंने अपना FIR दर्ज कराया वैसे सबका काम आसानी से हो जाए | मुझे FIR लिखवा कर इतनी ख़ुशी हुई की मै अपने सारे गम भूल गया |" अपना अनुभव साझा करने के लिए बहुत बहुत धन्यवाद!

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प्रिय लहर जी ..... सप्रेम नमस्कारम ! आपका सुख इस मामले में सभी का सांझा बन जाए यही कामना है (हमेशा के लिए –सिर्फ चुनावी बुखार में नहीं ) लेकिन आपका दुःख पहले केवल तो सिर्फ आपका ही था लेकिन इस ब्लॉग को लिखने के बाद ब्लागरों से अपना दुःख सांझा करके यकीनन ही आपका दुःख किसी हद तक कम हो ही गया होगा ...... आपसे गम हमेशा ही दूर रहे इन्ही कामनाओं के साथ :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

1 सितंबर, 1969 मुअम्मर गद्दाफी अपने युवा काल में अरब नेता गमल अब्दुल नासिर के प्रशंसक थे. एक सिपाही होने के नाते उन्होने लीबिया को राजशाही से छुड़ाने के लिए सबसे पहली योजना बनाई थी. शुरूआती दिन (1970 का दौर): कर्नल गद्दाफी ने ग्रीन बुक नाम का खुद का राजनीतिक फ़लसफ़ा बनाया. उन्होने मध्य पूर्व अरब में 1973-74 में हुए तेल संकट के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हालाकि संपूर्ण अफ्रीका के हितों का प्रतिनिधित्व करने की उनकी इच्छा पूरी नही हो पाई थी वॉन फ्लेचर (अप्रैल 1984): लीबिया के लंदन दूतावास के बाहर गद्दाफी के ख़िलाफ हो रहे प्रदर्शन के दौरान एक युवा पुलिसकर्मी वॉन फ्लेचर को दूतावास में गोली मार दी गई थी. यह एक अंतरराष्ट्रीय घटना बन गई थी. अमरीकी हमलें (15 अप्रैल, 1986): आईरिश रिपब्लिकन आर्मी और पैलेसटाइन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन जैसे चरमपंथियों के कर्नल गद्दाफी के साथ होने के कारण अमरीका के त्तकालीन राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन ने गद्दाफी को "मैड डॉग" कहा था. लॉकरबाय (21 दिसम्बर, 1988): स्कॉटलैड के शहर लॉकरबाय पर पैन-ऐम फ्लाइट 103 के हवा में विस्फोट हो जाने के बाद अमरीका और लीबिया के बाच विवाद काफी बढ़ गया था. सहयोग (1999-2003): लॉकरबाय बम धमाका के मामले में दो लीबियाई नागरिकों को साल 1999 में स्कॉटलैड के एक अदालत में पेश किया गया था. लीबिया की वापसी (मार्च 2004): पाबंदियों के हटने के बाद त्रिपोली ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में दोबारा वापसी की. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और अनय कई विश्वस्तरीय नेता लीबिया के दौरे पर आए. सबसे लंबा भाषण (23 सितंबर, 2009): संयुक्त राष्ट्र के महासम्मेंलन में अपने पहले भाषण में कर्नल गद्दाफी ने दिए गए समय से करीब एक घंटा ज्यादा, 96 मिनटों तक बोलते रहे. विरोध-प्रदर्शन का दौर (फरवरी 2011): पड़ोसी देश ट्यूनीशिया और मिस्र में हो रहे जनांदोलन और मानव अधिकारों के लिए लड़ रहे एक व्यक्ति की गिरफ़्तारी के बाद लीबिया में भी सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन शुरू हो गए. नैटो हमलें (19 - 20 मार्च, 2011): अपने ही देश में प्रदर्शनकारियों से जूझते गद्दाफी सरकार के ख़िलाफ़ नैटो ने ''लीबिया के नागरिकों की जान बचाने के लिए'' हवाई हमलें शुरू कर दिए. त्रिपोली में सरकार गिरी (23 अगस्त, 2011): लीबिया में प्रदर्शन शुरू होने के छह महीने बाद विद्रोहियों ने त्रिपेली पर कबज़ा कर लिया. सिर्त में गद्दाफी की मौत (20 अक्तूबर, 2011):कर्नल गद्दाफी को विद्रोहियो ने सिर्त में पकड़ लिया और उनकी मौत हो गई. लीबिया की अंतरिम सरकार के अधिकारियों ने कहा है कि गद्दाफी गोलीबारी में घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई.

के द्वारा: Lahar Lahar

श्री लहर जी,. सादर नमस्कार ! हमें यह हमेश याद रखना चाहिए की प्रत्येक चीज के दो पहलू होते हैं | नारी के विषय में यह कोई नयी बात नहीं है | नारी को यदि नरक का द्वार कहा गया तो उसी नारी के लिए कहा गया "यत्र नारी पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता " आज के परिदृश्य में भी यदि कुछ पाश्चात्य सभ्यता का अन्धानुकरण कर रही हैं, तो वहीँ अधिकांश ऐसी भी हैं जिनमें आज भी ममतामयी माँ, स्नेहमयी बहन तथा पतिव्रता पत्नी के गुण विद्यमान है | यह हमारी संस्कृति है और भले ही सभ्यता बदल जाये परन्तु संस्कृति कभी नहीं बदलती | और नारी तो शक्ति स्वरूपा मानी गयी है इसलिए वह हमेशा पुरुष को नचाती रहेगी -----वैसे भी कहा गया है -------"एक नहीं दो-दो मात्राएँ, नर से भारी नारी ||" आपको सपरिवार दिवाली की अग्रिम हार्दिक शुभकामनाये |

के द्वारा: naturecure naturecure

वंदे मातरम ... मनोज जी सप्रेम नमस्कार आप जैसे क्रांतकारी देशभक्त ने मेरे ब्लॉग पर प्रतिक्रया दिया मुझे सच में बहुत ख़ुशी हुई | आपने भगत सिंह का नाम लिया तो उनके लिए एक मशहुर वीररस की शायरी कहना चाहूँगा शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले | वतन पे मरने वालों का यही बाकि निशान होगा हर जगह दो तरह के लोग होते है एक गरम दल और एक नरम दल दोनों की अपनी - अपनी उपयोगिता होती है | भगत सिंह जी ने जो किया उसके लिए हमारा पूरा राष्ट्र उनका हमेशा कृतज्ञ रहेगा | उन्होंने राष्ट्र की सेवा अपने तरीके से की और गाँधी जी ने अपने तरीके से | दोनों ही देशभक्तों ने राष्ट्र की अतुलनीय सेवा की मेरा नमन है उनके चरणों में | आपने बहुमूल्य प्रतिक्रिया दी आपको कोटिशः धन्यवाद | जय हिंद | जय भारत |

के द्वारा: Lahar Lahar

भाई लहर जी..वंदे मातरम| सहमति और असहमति एक अलग बात हो सकती है किन्तु राष्ट्रीयता से बड़ा तो कोई भी नहीं हो सकता, कभी भी नहीं हो सकता और क्या ऐसा होना चाहिए|यदि आप हमारे विचार से सहमत नहीं हैं तो आप हमारी उपेक्षा कर दे यह बात तो समझ में आती है किन्तु आप हमसे असहमत है तो मेरे विजित होने के बावजूद आप यह क्यों कहेंगे की ''डॉक्टर पट्टाभिसीतारमैया की हार मेरी हार है'' क्या यह राष्ट्र से बढ़कर स्वयं के अहंकार का उदंड प्रदर्शन नहीं है|इश्वर के साथ अल्ला का जोड़ मंदिरों के साथ, मस्जिदों, गिरजाघरों और चर्चों में क्यों नहीं गूंजता|अनेक प्रश्न हैं महोदय|गांधी का प्रवेश तो राष्ट्रीय राजनीति में १९२० के बाद ही चर्चा का विषय बनाया गया, उससे पहले और भी लोग थे क्या उनकी जयंतियां कम मूल्यवान है? बहुत लंबा हो जाएगा|मेरे विचार से भगत सिंह का बम्ब गांधी के विचारों से कहीं अधिक अहिंसक है जिसने पार्लियामेंट में खून का एक कतरा नहीं बहाया और हँसते हँसते फांसी के फंदे पर झूल गएँ| मादरे वतन पर हम जान निसार करते हैं ..खुश रहो अहले वतन अब हम तो सफर करते हैं|वंदे मातरम|

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